IPC की धाराधारा 504 और 506 पर क्या सजा होती है? - Indian Kanoon

IPC की धाराधारा 504 और 506 पर क्या सजा होती है?

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IPC यानी INDIAN PENAL CODE में भारत में रहने वाले लोगों के द्वारा किए गए क्राइम को डिफाइन किया गया है और उनके लिए सजा या पनिशमेंट का PROVISION किया गया|

IPC को 1860 में ब्रिटिश काल में लागू किया गया था| जम्मू कश्मीर और इंडियन मिलिट्री को छोड़ कर के पूरे भारत में लागू है| INDIA के साथ साथ ही पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी IPC लागू है|

आईपीसी की धारा 504 क्या कहती है| अगर कोई व्यक्ति यदि किसी अन्य व्यक्ति का अपमान करता है, उसकी INSULT करता है, कोई क्राइम करने के लिए उसको उकसाता है| तो उस पर IPC की धारा 504 लगती है| इसको आप आसान से शब्दों में ऐसे समझिए कि कोई एक व्यक्ति दूसरे अन्य व्यक्ति की INSULT करता है, अपमान करता है और वह यह जानता है कि मैं अगर इसका अपमान करूंगा तो यह कोई क्राइम करेगा तो उस पहले व्यक्ति पर जो अपमान करता है IPC की धारा 504 लगती है| आईपीसी की धारा 504 में 2 साल तक की सजा का PROVISION किया गया है|

आईपीसी की धारा 506 – यदि कोई भी व्यक्ति अन्य व्यक्ति को धमकी देता है| जैसे कि किसी को जान से मारने की धमकी देना या किसी को आग से जलाना या किसी की प्रॉपर्टी को आग से जला कर खत्म करने की धमकी देना, या किसी का रेप करने की धमकी देना| तो इस तरह की धमकी अपराधिक यानी क्रिमिनल धमकी कहलाती है| ऐसी धमकियां देने पर आईपीसी की धारा 506 लगती है| धमकी के साथ साथ ही अगर कोई व्यक्ति किसी इज्जतदार औरत की आबरू पर उसकी इज्जत पर लांछन लगाता है| तो उसके ऊपर IPC की धारा 506 लगती है| इसको आप ऐसे समझिए कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को किसी ऐसे क्राइम के लिए धमकी देता है| तो उस क्राइम को करने पर कम से कम 7 साल की सजा हो सकती है या मौत की सजा हो सकती या फिर उम्र कैद सजा हो सकती है. IPC की धारा 506 में 7 साल की सजा या जुर्माना या फिर सजा और जुर्माना दोनों का ही PROVISION किया गया है| IPC की धारा 506 में गवाहों की ज्यादा जरूरत नहीं होती| अगर पीड़ित यानी जिस को धमकी दी गई है| वह कोर्ट में यह साबित कर दे कि उसको इस चीज की धमकी दी गई है| तो IPC की धारा 506, धारा 302 और 307 से भी खतरनाक होती है|

ललितपुर। अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने मारपीट के मामले में दोनों पक्षों को सजा सुना दी है। एक पक्ष को पांच तो दूसरे को तीन वर्ष का कारावास भुगतना होगा।

28 मई 2005 को खेत में जानवर घुसने के विवाद में महरौनी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुड़िया निवासी सुजान, चन्द्रभान पुत्रगण जानकी प्रसाद, खेमचंद पुत्र सुजान एवं रेनू का विवाद गंाव के ही गोकुल, सुशील पुत्रगण भगवानदास एवं राजेश पुत्र गोकुल से हो गया था। दूसरा पक्ष पहले पक्ष के घर जानवर का उलाहना देने के लिए पहुंचा था। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। दोनों ओर से लाठी डंडे चले। दोनों ने महरौनी थाने पहुंचकर अपनी- अपनी आपबीती सुनाई और पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ धारा 323, 504, 506 के तहत मामला पंजीकृत कर लिया।
घटना में गंभीर रूप से घायल चंद्रभान की उपचार के दौरान चार जून 2005 को ग्वालियर में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। चन्द्रभान की मौत के बाद पुलिस ने दूसरे पक्ष के खिलाफ मामले को 304, 325, 323, 504, 506 में तरमीम कर दिया था। शनिवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश मुकेश प्रकाश के समक्ष दो

 

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